सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव

कारगिल विजय दिवस की सब को बहुत बधाई

हे कारगिल के शूर वीर,शत शत है नमन तुम्हारा।
भारत माता के लाल तुम्हीं,है गर्वित भारत सारा।

कारगिल विजय दिवस की,सब को बहुत बधाई।
अमर शहीदों ने अपनी जानें,देकर विजय है पाई।

भारत माता की रक्षा में,कर दिये प्राण न्योछावर।
उन वीर सपूतों को श्रद्धा,के फूल समर्पित सादर।

उस वक्त तो सेना में हर,साजोसामान रहा अधूरा।
बोफोर्स  तोपों ने  गोला,बारूद बरसाया था पूरा।

कारगिल संघर्ष में गोला,बारूद से लेकर ये राडार।
दूसरे देशों पर निर्भरता,सैटेलाइट तस्वीरें हथियार। 

भारत अब मजबूत हुआहै,किसी पर नअब निर्भर।
उन्नत हथियार सर्विलेंस तंत्रमें,काफी आत्मनिर्भर।

कारगिल युद्ध बाद तीनों,सेनाओं की शक्ति बढ़ाई।
रडार मिसाइलें चापर्स टैंक,व फाइटर प्लेन बढ़ाई।

अब भारत हर मौसम में,दुश्मन से लड़ने में सक्षम।
सेनाके आधुनिकीकरण से,साजोसामान में सक्षम।

कोई दुश्मन इस भारत को,आँख दिखा न सकता।
पलभर में तोपें,युद्धक विमान उन्हें सीख देसकता।

येहैआधुनिक भारत,इसको डर न किसी का भाई।
जो चाहेगा आँख दिखाना,उसकी आँखें गई  भाई।


रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
(शिक्षक,कवि,लेखक,समीक्षक एवं समाजसेवी)
इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर,नार्थ इंडिया
एलायन्स क्लब्स इंटरनेशनल,कोलकाता-इंडिया
संपर्क : 9415350596

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

रक्तबीज कोरोना प्रतियोगिता में शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को मिला श्रेष्ठ साहित्य शिल्पी सम्मान

रक्तबीज कोरोना प्रतियोगिता में शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को मिला श्रेष्ठ साहित्य शिल्पी सम्मान महराजगंज टाइम्स ब्यूरो: महराजगंज जनपद में तैनात बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक व साहित्यकार दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को श्रेष्ठ साहित्य शिल्पी सम्मान मिला है। यह सम्मान उनके काव्य रंगोली रक्तबीज कोरोना के चलते मिली है। शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी ने कोरोना पर अपनी रचना को ऑनलाइन काव्य प्रतियोगिता में भेजा था। निर्णायक मंडल ने शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल के काव्य रंगोली रक्तबीज कोरोना को टॉप 11 में जगह दिया। उनकी रचना को ऑनलाइन पत्रियोगिता में  सातवां स्थान मिला है। शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी को मिले इस सम्मान की बदौलत साहित्य की दुनिया में महराजगंज जनपद के साथ बेसिक शिक्षा परिषद भी गौरवान्वित हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक बैजनाथ सिंह, अखिलेश पाठक, केशवमणि त्रिपाठी, सत्येन्द्र कुमार मिश्र, राघवेंद्र पाण्डेय, मनौवर अंसारी, धनप्रकाश त्रिपाठी, विजय प्रकाश दूबे, गिरिजेश पाण्डेय, चन्द्रभान प्रसाद, हरिश्चंद्र चौधरी, राकेश दूबे आदि ने साहित्यकार शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को बधाई दिय...

डॉ0 हरि नाथ मिश्र

लेखनी के यशस्वी पुजारी- कालिदास की उपमा उत्तम,बाणभट्ट की भाषा, तुलसी-सूर-कबीर ने गढ़ दी,भक्ति-भाव-परिभाषा। मीर व ग़ालिब की गज़लों सँग,मीरा के पद सारे- "प्रेम सार है जीवन का",कह,ऐसी दिए दिलासा।।                       बाणभट्ट की.........।। सूत्र व्याकरण के सब साधे,अपने ऋषिवर पाणिनि, वाल्मीकि,कवि माघ सकल गुण, पद-लालित्य में दण्डिनि। कण्व-कणाद-व्यास ऋषि साधक,दे संदेश अनूठा- ज्ञान-प्रकाश-पुंज कर विगसित,हर ली सकल निराशा।।                    बाणभट्ट की.............।। गुरु बशिष्ठ,ऋषि गौतम-कौशिक,मानव-मूल्य सँवारे, औषधि-ज्ञानी श्रेष्ठ पतंजलि,रोग-ग्रसित जन तारे। ऋषि द्वैपायन-पैल-पराशर,कश्यप-धौम्य व वाम- सबने मिलकर धर्म-कर्म से,जीवन-मूल्य तराशा।।                 बाणभट्ट की.............।। श्रीराम-कृष्ण,महावीर-बुद्ध थे,पुरुष अलौकिक भारी, महि-अघ-भार दूर करने को,आए जग तन धारी। करके दलन सभी दानव का,ये महामानव मित्रों- कर गए ज्योतिर्मय यह जीवन,जला के दीपक आशा।। ...

डा. नीलम

*गुलाब* देकर गुल- ए -गुलाब आलि अलि छल कर गया, करके रसपान गुलाबी पंखुरियों का, धड़कनें चुरा गया। पूछता है जमाना आलि नजरों को क्यों छुपा लिया कैसे कहूँ , कि अलि पलकों में बसकर, आँखों का करार चुरा ले गया। होती चाँद रातें नींद बेशुमार थी, रखकर ख्वाब नशीला, आँखों में निगाहों का नशा ले गया, आलि अली नींदों को करवटों की सजा दे गया। देकर गुल-ए-गुलाब......       डा. नीलम