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छत्र छाजेड़ फक्कड़

पाछो जाणो ही पड़सी

छत्र छाजेड़ “फक्कड़”

अेक जुग बीतग्यो
गांव गयो ही कोनी
अबके गयो तो लाग्यो
सागी हो ही कोनी

न तो बो सुख हो
न ही बो आणंद हो
न ही बा तिरपती मिली
घणी रामाण करी
घणी खेछल़ खायी
जणां चिंतन री सुई हिली
अबै
मैं ,मैं ही कठै रैयो
दो दिनां रो पावणो
फेर छोड गांव पाछो स्हैर गयो
याद आवै
बै लहरिया मंड्या धोरा
कबडी खेलता छोरी
खेतां खेतां रोही में घूमणो
जाल़ चढ़ 
गूंदीया अर पीलिया खाणो
दो पांवडा़ दरखत धरणो
अब कठै म्हारै बस रैयो
सोचूं 
पाणी बैवे नल़कां में 
कठै कुवो अर कुवे री सारण
कठै पींपल़ रो गट्टो
चिलम सारती गट्टे री चौपाल़
पणघट दोघड़ अर
पिणहारी गांवती डावड़्यां
कठै गोचर
कठै धीणो अर बिलोणो
कठै रोटी पर गोरो गुटगुटियो सो चूंटियो
अर
कठै कांदां सागै दही राबडी़
चौक चांदणी भादूडो़ कुण गावै
कठै मंडे हींडा,कुण तीज्यां गावै
कठै तीजां रा मेला़ मगरिया
कठै खांड रो चपडो़ अर म्हैल मालि़या
कुण काती न्हावै
कातीसरे में काचर,बोर,मतीरा
कुण मोरै अर सीट्टा खावै
कुण माटी रा दिवला़ सजावै
पण
भींता जरूर जगमग करै
जद बीजली़ रा लोटिया चसै
कठै त्यूंहार री ठसक
औपचारिक दियाली़ सूनी जावै
फागणिये
कुण कागै री चूंच मंढावै
कुण घालै घींदड़
कुण मधरा चंग बजावै
कठै नाचणिया रसिया
कुण धमालां गावै

अब तो फटफटियां रो रोलो़ है
भीड़ भाड़ रमझोलो़ है
बात करण बगत कठै
फ़ोन धरया है हाथां में 
इंटरनेट पर दिन कटज्या
के धरयो है रिस्तां नातां में
 

मन होलै़ सी बोल्यो
क्यूं पडै़ घणे पचडे़ में 
तूं के कर लेसी
दो दिन रो सपनो समझ
फेर तो गदहा खटे ज्यूं खटणो पड़सी
बै मौज मजा है बीतै दिनां री बातां
जीणो है भाटा रै जंगल़ में 
अै ही है करमां रा खाता
दो दिन पछै
तनै भी गांव छोड
पाछो स्हैर जाणो ही पड़सी

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