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मार्कण्डेय त्रिपाठी

गो सेवा

गो माता की सेवा कर लो,
सारा दुख मिट जाएगा ।
गो में सारे देव विराजें ,
भव बंधन पिट जाएगा ।।

गोरज,गोरस , गोर्वधन से,
सज्जित गोकुल और गोपाल ।
गोमाता की महिमा न्यारी,
गो सेवा से उन्नत भाल ।।

गो स्पर्श अधिक सुखकारी ,
होती मधुर भाव की वृष्टि ।
सकारात्मक ऊर्जा मिलती,
परिवर्तित हो जाती दृष्टि ।।

गैया पंचगव्य देती है ,
जो है सच में दिव्य प्रसाद ।
लोक और परलोक सभी के,
मिट जाते जिससे अवसाद ।।

जिस घर में गोमाता होती ,
उस घर में लक्ष्मी का वास ।
प्रेमपूर्ण माहौल वहां का ,
दुश्चिंतन का होता नाश ।।

गाय नहीं रख सकते घर में,
गो सेवा हित करो प्रयास ।
गोशालाओं को अर्पित धन
से भी बंधी रहेगी आस ।।

भले चीता है राष्ट्रीय पशु अब,
गैया को भी दो सम्मान ।
हिन्दू हृदय सच खिल जाएगा,
मिट जाएगा सब अपमान ।।

दीवाली के बाद गोवर्धन
पूजा है,इसका है ध्यान ।
गो पूजा हम करें सहर्षित,
इसमें छिपा जगत् कल्याण ।।

गैया केवल पशु नहीं है,
वह है संस्कृति का आधार ।
हिन्दू धर्म की पोषक है यह,
जिससे रक्षित है संसार ।।

मिलजुलकर योजना बनाएं,
सामूहिक गो पूजन आज ।
अजब छटा बिखरेगी सचमुच,
होगा तिलक,माथ पर ताज ।।

देगी शुभाशीष हम सबको,
धन्य बनेगा हिन्दू समाज ।
आओ मिलकर कदम बढ़ाएं,
यह है पूण्य धर्म का काज ।।

शहरों में तो यह दुष्कर है,
ग्राम्य क्षेत्र में यह आसान ।
हिन्दू जन मानस जागे तो,
फिर से गूंजेगा गो गान ।।

मार्कण्डेय त्रिपाठी

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