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एस के कपूर श्री हंस

*।।रचना शीर्षक।।*
*।। सोच में अपने बस जीत का*
*ही नाम रखो।।*
*।।विधा।।मुक्तक।।*
1
मन में सपनें   और  हौसलों
में   उड़ान      रखो।
जीतने को   तुम पूरी जमीन
आसमान       रखो।।
बुद्धि विवेक  आशा विश्वास
सब मंत्र सफलता के।
कदापि निराशा   नहीं  आये
बस यह ध्यान रखो।।
2
सितारों से आगे   तक    भी
जहान               है।
साहस के   सामने  दूर  नहीं
जीत का निशान है।।
हार से होकर ही   निकलता
है  जीत   का रास्ता।
अंधेरा ढल के फिर सुबह ये
विधि का विधान है।।
3
जान लो कि   व्यक्तित्व  की
अपनी जुबान होती है।
तभी जाकर     किसी    की
बात महान  होती है।।
जो टूट कर भी     खुद   से
गर         हारा नहीं।
तब फिर जीत ही  आखिरी
मुकाम    होती है।।
4
दिल में अरमानओ हौंसलों
में    उड़ान   रखो।
मनोबल ऊँचा        अपना 
आसमान    रखो।।
शीशा पत्थर तोड़ के बाज़ी
पलट    सकता है।
खुद के काम पे अपने ऐसा
अभिमान   रखो।।
*रचयिता।।एस के कपूर "श्री हंस"*
*बरेली।।*
*©. @.   skkapoor*
*सर्वाधिकार सुरक्षित*

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