🙏*मेरे कान्हा*🙏
कान्हा छोड़ न देना मेरा हाथ
से विश्वास कान्हा दोगे साथ
जब कोई न मेरे साथ हो
पर मन में ये विश्वास हो।
तुम थाम ले मुझे कृष्णा
दोगे सदा मुझे सहारा।
मन निशदिन भटक रहा ।
उलझनों में उलझ रहा।
राह तुही दिखादे अब।
मरीचिका से निकले हम।
गिरने ना देना मुझे कान्हा
ठोकर लगे जब पाँव मै।
कश्ती न डगमगाते मेरी।
घिर के कभी तुफान में।
बल्ली लगा देना कृपा की ।
मिल जा़ये कृष्णा किनारा।
🙏🌹*सुप्रभात*🌹🙏
ऊषा जैन कोलकाता
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