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मार्कण्डेय त्रिपाठी

लक्ष्मी आएंगी

मन में हो उत्साह तो लक्ष्मी आएंगी ।
कुछ करने की चाह , तो लक्ष्मी आएंगी ।
मंत्र जाप करने से कुछ भी नहीं होता,
छोड़ो निज आलस्य, तो लक्ष्मी आएंगी ।।

कैसे कार्य किया जाता,यह विधि जानो ,
सही तरीका समझो, लक्ष्मी आएंगी ,
व्यसनों से परहेज़ करो, प्रिय बंधु मेरे ,
मन में हो शुचि भाव, तो लक्ष्मी आएंगी ।।

बनो पराक्रमशील, कर्म पर ध्यान रखो,
पौरुष पर विश्वास तो लक्ष्मी आएंगी  ।
रखो कृतज्ञता भाव, सहज होकर जीओ ,
मानो नित उपकार,तो लक्ष्मी आएंगी ।।

अटल मित्रता भाव , सदा मन में रखो ,
करो मित्र सम्मान, लक्ष्मी आएंगी ।
सोच समझकर खर्च करो, प्रिय मीत मेरे,
रखो मितव्ययी भाव, लक्ष्मी आएंगी ।।

बूंद, बूंद से सागर बनता,यह जानों,
रखो पैसे का मान, लक्ष्मी आएंगी ।
है चंचला स्वभाव, ध्यान इसका रक्खो,
करो न तुम अभिमान, लक्ष्मी आएंगी ।।

कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता,
रखो कर्म सिद्धांत, लक्ष्मी आएंगी ।
लक्ष्मी आरती गा लेने से क्या होगा,
मन में है शुचि भाव, तो लक्ष्मी आएंगी ।।

कर्मों के प्रति पूज्य भाव,मन में रखना,
नियति रखोगे साफ, तो लक्ष्मी आएंगी ।
कम से कम वह एक बार दस्तक देती,
अगर रहे तैयार, तो लक्ष्मी आएंगी ।।

भाग्य कर्म से ही बनता,यह सच जानो ,
करो कर्म से प्यार, लक्ष्मी आएंगी ।।

मार्कण्डेय त्रिपाठी

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