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शिवशंकर तिवारी

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ये साल ,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 
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ये साल जिसकी यादों में फिर गुजर गया ।
वो शख्स अपनें वादों से फिर मुकर गया 
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बदला नहीं है अब भी तन्हाईयों का मौसम ।
सायों की भीड़ देकर, वो फिर किधर गया  ।।
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ताज़े जख़म पे दिल के, हैं बेअसर दवाएँ ।
टूटा ज़िगर तो पल में, सपना बिखर गया  ।।
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ता उम्र साथ उसको चलना था इस सफर में ।
कुछ  दिन  में मेरा रहबर , जाने किधर गया  ।।
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दिन में सुकून है ना रातों मे चैन उस बिन  
ग़म दे के ज़िन्दगी को, जान ए ज़िगर गया  
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हम आरज़ू  में उसकी, होते रहे  फ़ना  । 
वो जुस्तजू  में किसकी ,देखो   सँवर  गया  ।।
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शिवशंकर तिवारी ।
छत्तीसगढ़  
31/12/2021 
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