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दिलीप कुमार पाठक सरस

~ 🌹गीत 🌹~
*हिंदी रचती नई कहानी है*
🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫
तुम दीपक हो, मैं हूँ बाती, 
      तुम सूरज, मैं भोर-प्रभाती |
तुम सागर, मैं नदिया प्यारी, 
      तुम अम्बर , मैं धरा तुम्हारी |
तुम पत्थर हो, मैं हूँ पानी,
         तुम राजा हो, मैं हूँ रानी |
शब्द-अर्थ की प्रीति- सुहानी, 
          हिंदी रचती नई कहानी ||

वर्णों ने लघु गुरु स्वर देकर,
 साथ सरस यति-गति का लेकर | 
कहीं रुकावट बने न बाधा, 
      पहले अपनी लय को साधा ||
फिर स्वर से मिलवाए व्यंजन, 
         जैसे आँखों में हो अंजन |
भेद मिले जब व्यंजन ध्वनि से, 
     शब्द बनाते तब जग-ज्ञानी ||
शब्द- अर्थ की प्रीति- सुहानी ,
           हिंदी रचती नई कहानी ||
    
शब्दों के पर्याय कई हैं, 
       अर्थों के अध्याय कई हैं |
शब्द विलोमों की है नगरी, 
       अर्थ-भरी शब्दों की गगरी ||
कहीं कहावत, मुहावरे हैं,
        वाक्यांशों के शब्द भरे हैं |
रूढ़ी यौगिक योगरूढ़ बन, 
        गद्य-पद्य दोनों के सानी |
शब्द-अर्थ की प्रीति-सुहानी,
        हिंदी रचती नई कहानी ||

माथ सजाए माता हिंदी 
        दो रूपों वाली है बिंदी|
सबसे अनुपम न्यारी हिंदी, 
        भारत की है प्यारी हिंदी ||
जीवन संस्कृति संस्कारों का, 
       है पलना भाव-विचारों का |
सहज सरल मनभावन हिंदी, 
      माँ की ममता 'सरस'-बखानी  ||
शब्द-अर्थ की प्रीति-सुहानी,
       हिंदी रचती नई कहानी ||

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~©दिलीप कुमार पाठक 'सरस'

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