सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

चंद्रप्रकाश गुप्त चंद्र

शीर्षक -   भारतीय नव वर्ष 

बसंत बहारों फागुनी रंग बयारों से पाकर यौवन,पूरा भारत झूम रहा है आज

अवनि और अंबर प्रफुल्लित हो रहे, सभी देव सुमन वर्षा रहे आज

मंद पवन के झोकों से चहुं ओर बह रही, सुरभि सुगंधित आज

दशों दिशाएं पुलकित हैं, भारत की महिमा के गीत गा रहीं आज

देख छटा भारत भूमि की , प्रकृति सृष्टि भी पुलक रही है आज

सूर्य-शशि में होड़ लगी है, भारत माता की आरती कौन उतारे आज

भारत माता का वैभव श्रंगारित स्वरूप देख, ऋद्धि सिद्धि भी लजा रहीं हैं आज

पूरा भारत नव दुर्गा की नवधा भक्ति शक्ति की, उपासना शुरू कर रहा आज

जवान, किसान, युवा, उद्यमी, स्त्री-पुरुष, सब में  सृजन साकार हो रहा आज

उत्तर- दक्षिण,पूरब- पश्चिम खुशियां छायीं,सब एक सूत्र में बॅ॑ध रहे आज

उत्साह, ऊर्जा की लहर उठाता, युग बोध की स्मृति जगाता,नव वर्ष आ गया आज

पुण्य धरा भारत की घर घर में धन-धान्य की, खुशहाली लाती आज

शस्यश्यामला भारत माता सतरंगी, परिधान पहन है हर्षाती आज

आर्यावर्त भरतखण्ड की इस पुण्यभूमि की,यश कीर्ति गा रहा विश्व आज

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा प्रति वर्ष, है हमारा नव वर्ष, प्रकृति सृष्टि भर जाती है चिर यौवन से आज....

बसंत बहारों फागुनी रंग बयारों से पाकर यौवन, पूरा भारत झूम रहा है आज.......

अवनि और अंबर प्रफुल्लित हो रहे, सभी देव सुमन वर्षा रहे आज ......

       जय भारत जय हिन्द


      चंद्रप्रकाश गुप्त "चंद्र"
  (ओज कवि एवं राष्ट्रवादी चिंतक)
        अहमदाबाद, गुजरात

***********************************
       सर्वाधिकार सुरक्षित
***********************************

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

रक्तबीज कोरोना प्रतियोगिता में शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को मिला श्रेष्ठ साहित्य शिल्पी सम्मान

रक्तबीज कोरोना प्रतियोगिता में शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को मिला श्रेष्ठ साहित्य शिल्पी सम्मान महराजगंज टाइम्स ब्यूरो: महराजगंज जनपद में तैनात बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक व साहित्यकार दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को श्रेष्ठ साहित्य शिल्पी सम्मान मिला है। यह सम्मान उनके काव्य रंगोली रक्तबीज कोरोना के चलते मिली है। शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी ने कोरोना पर अपनी रचना को ऑनलाइन काव्य प्रतियोगिता में भेजा था। निर्णायक मंडल ने शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल के काव्य रंगोली रक्तबीज कोरोना को टॉप 11 में जगह दिया। उनकी रचना को ऑनलाइन पत्रियोगिता में  सातवां स्थान मिला है। शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी को मिले इस सम्मान की बदौलत साहित्य की दुनिया में महराजगंज जनपद के साथ बेसिक शिक्षा परिषद भी गौरवान्वित हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक बैजनाथ सिंह, अखिलेश पाठक, केशवमणि त्रिपाठी, सत्येन्द्र कुमार मिश्र, राघवेंद्र पाण्डेय, मनौवर अंसारी, धनप्रकाश त्रिपाठी, विजय प्रकाश दूबे, गिरिजेश पाण्डेय, चन्द्रभान प्रसाद, हरिश्चंद्र चौधरी, राकेश दूबे आदि ने साहित्यकार शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को बधाई दिय...

डॉ0 हरि नाथ मिश्र

लेखनी के यशस्वी पुजारी- कालिदास की उपमा उत्तम,बाणभट्ट की भाषा, तुलसी-सूर-कबीर ने गढ़ दी,भक्ति-भाव-परिभाषा। मीर व ग़ालिब की गज़लों सँग,मीरा के पद सारे- "प्रेम सार है जीवन का",कह,ऐसी दिए दिलासा।।                       बाणभट्ट की.........।। सूत्र व्याकरण के सब साधे,अपने ऋषिवर पाणिनि, वाल्मीकि,कवि माघ सकल गुण, पद-लालित्य में दण्डिनि। कण्व-कणाद-व्यास ऋषि साधक,दे संदेश अनूठा- ज्ञान-प्रकाश-पुंज कर विगसित,हर ली सकल निराशा।।                    बाणभट्ट की.............।। गुरु बशिष्ठ,ऋषि गौतम-कौशिक,मानव-मूल्य सँवारे, औषधि-ज्ञानी श्रेष्ठ पतंजलि,रोग-ग्रसित जन तारे। ऋषि द्वैपायन-पैल-पराशर,कश्यप-धौम्य व वाम- सबने मिलकर धर्म-कर्म से,जीवन-मूल्य तराशा।।                 बाणभट्ट की.............।। श्रीराम-कृष्ण,महावीर-बुद्ध थे,पुरुष अलौकिक भारी, महि-अघ-भार दूर करने को,आए जग तन धारी। करके दलन सभी दानव का,ये महामानव मित्रों- कर गए ज्योतिर्मय यह जीवन,जला के दीपक आशा।। ...

डा. नीलम

*गुलाब* देकर गुल- ए -गुलाब आलि अलि छल कर गया, करके रसपान गुलाबी पंखुरियों का, धड़कनें चुरा गया। पूछता है जमाना आलि नजरों को क्यों छुपा लिया कैसे कहूँ , कि अलि पलकों में बसकर, आँखों का करार चुरा ले गया। होती चाँद रातें नींद बेशुमार थी, रखकर ख्वाब नशीला, आँखों में निगाहों का नशा ले गया, आलि अली नींदों को करवटों की सजा दे गया। देकर गुल-ए-गुलाब......       डा. नीलम