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सूरज मिश्रा

नया साल आ गया हमारा आओ मिलकर दीप जलाये.
अप्रैल फूल मे पडे हुये उनको फिर से हिन्दुत्व सिखाये.
नयी बहारे नया चमन है नये नये सब फूल खिलाये.
नया सवेरा नयी शाख हैं नये नये व्यवहार चलाये.
करे अदब से बात सभी से जलने ना दें कोई अलाये.
आओ मिलकर दीप जलाये!


सबसे पुराना सम्बत हिन्दू आओ इसका मान बढाये
नष्ट करे जो इसको मलेक्छी उसपर भी प्रत्यंच चढाये
ज्वालाये गहरी हो फिर भी सबसे पहले इसे बचाये
मस्तक उठे गगन मे लहरें कसम हमे अभिमान लचाये 
चाँद सितारे मिलकर उपर हिन्दू हिन्दुत्व का शोर मचायें
आओ मिलकर दीप जलायें 2
 
संस्कृति प्रकृति बहने दोनो सहमे हुये परिंदे है
संस्कृति प्रकृति के दुश्मन है सबसे बडे दरिंदे है
रिस्ते को रिस्ता ना समझे हैवानो सी चाह रखें
ऐसे पापी धर्म नही ये धरा मजहबी राह चखें
धरा धुसरित हो न कभी भी इस पर फिर से फूल उगायें 
आओ मिलकर दीप जलाये 2
                            kvi सूरज मिश्रा

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