सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

रामनाथ साहू ननकी

प्रीत पदावली  ----
19/03/2022


               ------ रे मन  -----
रे मन ये पागलपन छोड़ । 
व्यर्थ भटकता मृगतृष्णा पथ ,
चल अब अपनी धारा मोड़ ।।

ये  तेरा  दुर्भाग्य  रहा  है ,
कुछ भी न मिला सरस निचोड़ ।
व्यथित भाव रख कष्ट सहे सब ,
ये दुखदायी बंधन तोड़ ।।

गया समय स्वर्णिम होने का ,
नहीं कमाया लाख करोड़ ।
जो पाया बस तू ही जाना ,
चल हट , तज सारे अब होड़ ।।

गहन निराशा प्रेरित करते ,
खुद की अभी गर्दन मरोड़ ।
इतने पर भी समझ न आया ,
बनता रहा सदैव हँसोड़ ।।

पागल पंछी जहाज का है ,
अब तक नहीं सका तू छोड़ ।
मूल केन्द्र को त्याग सका कब
रहा ढ़ूँढ़ता वह गठजोड़ ।।


              ---- रामनाथ साहू " ननकी "
                      मुरलीडीह ( छ. ग. )

!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

टिप्पणियाँ

  1. होलिका दहन किया, परसों होली खेलो।
    भक्त प्रहलाद की सब जय जय जय बोलो।।

    हिरण्यकस्यप अचंभित, लाचार बेचारा।
    धर्म भी कहीं अधर्म से युगों में कभी हारा।।

    दानव दंभी को नरसिंह ने अंतत: तारा,
    माना हमने यह एक पौराणिक कथा है।
    हर पल यह बध अन्दर बाहर चलता है।
    मन में बैठा राम, रावण को अवसान करता है।।

    रावण अष्टपाश-सट् ऋपुओ पर हुआ हावी।
    पाप-पुण्य का खेल सबकी आती है बारी।।

    महापातकी के पाप को मरना हीं होता है।
    धर्मनिष्ठ का बाल नहीं बाँका कभी होता है।।

    पँच तत्वों में सतरंगी गुण धुला रहता है।
    उपर से हीं नहीं कुछ दिख सकता है।।

    रंगोली-अल्पना, होली में रंगों से पुतना।
    प्रकृति की ताल से है ताल मिलाना।।

    पिया के घर जा, रंग में पूरा रंग है जाना।
    उत्तम सात्विक आहार जम कर है खाना।।

    दुस्मन को दोस्त बना गले लगाना।
    हर पल होली के रंगों में रंग जाना।।

    भक्ती भाव में मिल-जुल कर बह जाना।
    ध्रिणा-द्वेश-क्रोध की अगन से मुक्त हो जाना।।

    धर्म ध्वजा चहुदिशी है हमको फहराना।
    सात रंग हैं प्रभु के, उनके रंग में रंग जाना।।

    डॉ. कवि कुमार निर्मल___✍️
    बेतिया, बिहार

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

रक्तबीज कोरोना प्रतियोगिता में शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को मिला श्रेष्ठ साहित्य शिल्पी सम्मान

रक्तबीज कोरोना प्रतियोगिता में शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को मिला श्रेष्ठ साहित्य शिल्पी सम्मान महराजगंज टाइम्स ब्यूरो: महराजगंज जनपद में तैनात बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक व साहित्यकार दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को श्रेष्ठ साहित्य शिल्पी सम्मान मिला है। यह सम्मान उनके काव्य रंगोली रक्तबीज कोरोना के चलते मिली है। शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी ने कोरोना पर अपनी रचना को ऑनलाइन काव्य प्रतियोगिता में भेजा था। निर्णायक मंडल ने शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल के काव्य रंगोली रक्तबीज कोरोना को टॉप 11 में जगह दिया। उनकी रचना को ऑनलाइन पत्रियोगिता में  सातवां स्थान मिला है। शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी को मिले इस सम्मान की बदौलत साहित्य की दुनिया में महराजगंज जनपद के साथ बेसिक शिक्षा परिषद भी गौरवान्वित हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक बैजनाथ सिंह, अखिलेश पाठक, केशवमणि त्रिपाठी, सत्येन्द्र कुमार मिश्र, राघवेंद्र पाण्डेय, मनौवर अंसारी, धनप्रकाश त्रिपाठी, विजय प्रकाश दूबे, गिरिजेश पाण्डेय, चन्द्रभान प्रसाद, हरिश्चंद्र चौधरी, राकेश दूबे आदि ने साहित्यकार शिक्षक दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को बधाई दिय...

डॉ0 हरि नाथ मिश्र

लेखनी के यशस्वी पुजारी- कालिदास की उपमा उत्तम,बाणभट्ट की भाषा, तुलसी-सूर-कबीर ने गढ़ दी,भक्ति-भाव-परिभाषा। मीर व ग़ालिब की गज़लों सँग,मीरा के पद सारे- "प्रेम सार है जीवन का",कह,ऐसी दिए दिलासा।।                       बाणभट्ट की.........।। सूत्र व्याकरण के सब साधे,अपने ऋषिवर पाणिनि, वाल्मीकि,कवि माघ सकल गुण, पद-लालित्य में दण्डिनि। कण्व-कणाद-व्यास ऋषि साधक,दे संदेश अनूठा- ज्ञान-प्रकाश-पुंज कर विगसित,हर ली सकल निराशा।।                    बाणभट्ट की.............।। गुरु बशिष्ठ,ऋषि गौतम-कौशिक,मानव-मूल्य सँवारे, औषधि-ज्ञानी श्रेष्ठ पतंजलि,रोग-ग्रसित जन तारे। ऋषि द्वैपायन-पैल-पराशर,कश्यप-धौम्य व वाम- सबने मिलकर धर्म-कर्म से,जीवन-मूल्य तराशा।।                 बाणभट्ट की.............।। श्रीराम-कृष्ण,महावीर-बुद्ध थे,पुरुष अलौकिक भारी, महि-अघ-भार दूर करने को,आए जग तन धारी। करके दलन सभी दानव का,ये महामानव मित्रों- कर गए ज्योतिर्मय यह जीवन,जला के दीपक आशा।। ...

डा. नीलम

*गुलाब* देकर गुल- ए -गुलाब आलि अलि छल कर गया, करके रसपान गुलाबी पंखुरियों का, धड़कनें चुरा गया। पूछता है जमाना आलि नजरों को क्यों छुपा लिया कैसे कहूँ , कि अलि पलकों में बसकर, आँखों का करार चुरा ले गया। होती चाँद रातें नींद बेशुमार थी, रखकर ख्वाब नशीला, आँखों में निगाहों का नशा ले गया, आलि अली नींदों को करवटों की सजा दे गया। देकर गुल-ए-गुलाब......       डा. नीलम