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नई कविता "सजल नयनों का छाप हूँ, आज मैं चुप-चाप हूँ"...पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें।

नई कविता "सजल नयनों का छाप हूँ, आज मैं चुप-चाप हूँ"...पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें। आज मैं चुप-चाप हूँ..... हृदय के पोर में कसक सा भरा तन - मन दोनों शिथिल सा परा बादलों की उमड़-घुमड़ छाप हूँ,             आज मैं चुप-चाप हूँ। रात भी दिन सा जला तम हृदय का हो भला प्रेम निश्छल विह्वल आप हूँ,         आज मैं चुप-चाप हूँ। विरह का अपना मजा है मिलन का  पल  सजा है सजल नयनों का छाप हूँ,     आज मैं चुप-चाप हूँ। रचना दयानन्द त्रिपाठी महराजगंज, उत्तर प्रदेश।

नई कविता "यूँ ही मन को फुसलाया करता हूँ".....क्लिक कर पूरी कविता पढ़े।

नई कविता " यूँ ही मन को फुसलाया करता हूँ".....क्लिक कर पूरी कविता पढ़े। यूँ ही मन को फुसलाया करता हूँ..... जीवन में आपाधापी है संकट  है  मन  पापी है। बैठ घोर तम में सोचा करता हूँ मन  में  द्वंद  चलाया  करता हूँ यूँ ही मन को फुसलाया करता हूँ। शूल बड़े हैं जीवन की राहों में कंटक  हैं  प्रतिपल   बाहों  में। निर्मम  छाया  से  टकराता  हूँ नयनों  के  मृदुल  खारे जल से पावन   हो   जाया   करता   हूँ यूँ ही मन को फुसलाया करता हूँ। मैं  अकिंचन  जीवन  पथ में  प्राण निछावर करने आया हूँ। बीते पलछिन को भुलाया करता हूँ उर के घातों को समझाया करता हूँ यूँ ही मन को फुसलाया करता हूँ। रचना दयानन्द त्रिपाठी महराजगंज, उत्तर प्रदेश।

अतंरराष्ट्रीय योग दिवस पर अंतरराष्ट्रीय योग प्रशिक्षिका कृष्णादेवी पाण्डेय जी नेपाल द्वारा काव्यरंगोली फेसबुक समूह पर आनलाइन योग प्रशिक्षण दिनांक 21 जून 2020 दिन रविवार प्रात: 6:30 से लाइव देखें।

अतंरराष्ट्रीय योग दिवस पर अंतरराष्ट्रीय योग प्रशिक्षिका कृष्णादेवी पाण्डेय जी नेपाल द्वारा काव्यरंगोली फेसबुक समूह पर आनलाइन योग प्रशिक्षण दिनांक 21 जून 2020 दिन रविवार प्रात: 6:30 से लाइव देखें। योग, भारत में योग का इतिहास बहुत पुराना है। शास्‍त्रों में भी योग का भरपूर जिक्र मिलता है। ऋग्‍वेद में भी योग की संपूर्ण व्‍याख्‍या की गई है।   27 सितंबर 2014 में संयुक्‍‍त राष्‍ट्र महासभा के भाषण में माननीय मुख्‍यमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस मनाए जाने की अपील की। इसके उपरांत अमेरिका ने 123 सदस्‍यों की बैठक में अंतर्राराष्‍ट्रीय योग दिवस का प्रस्‍ताव पास कर दिया। अमेरिका द्वारा अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस मनाए जाने की अपील करने के बाद, 90 दिनों के अंदर 177 देशों ने अंतर्राराष्‍ट्रीय योग दिवस का प्रस्‍ताव पारित कर दिया। 21 जून 2015 को पूरे विश्‍व में पहली बार अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस मनाया गया।    योग का उद्भव भारत से ही माना जाता है। भारत में योग का इतिहास लगभग 2000 वर्ष पुराना बताया गया है। भार‍त में स्‍वामी विवेकानंद ने योग की शुरुआत बहुत पहले कर दी थी। स्‍व...

भारत वीरों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि समर्पित, "सीमाएं जब जल उठती हैं, तो मानव का ही ह्रास होता है" पूरी कविता को क्लिक कर पढ़ेंं।

भारत वीरों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि समर्पित, "सीमाएं जब जल उठती हैं, तो मानव का ही ह्रास होता है" पूरी कविता को क्लिक कर पढ़ेंं। सीमाएं  जब  जल  उठती  हैं, तो मानव का ही ह्रास होता है एक दूसरे देशों के जनमानस में घोर   तनाव   बढ़   जाता   है। करने  दो  जो  वे  करते हैं अब सम्भव नहीं सुहाता है आँख   दिखाये   कोई   भी तो  चीर-फाड़  हो  जाता है। बीस जवानों के लहू के बदले कई सौ को मार गिराना होगा एक इंच भी सीमाएं खिसकाईं हैं तो किमी में सीमा बढ़ाना होगा। निर्धारित  सीमाओं  के  बदले युद्धों  में  आ  जाना ठीक नहीं देशों का अनाधिकृत चेष्ठा रखना जन जीवन  के  लिए ठीक  नहीं। जब सबकी सीमाएं निर्दिष्ट हैं तो रोज बिगुल क्यों बजाते हैं क्या सीमाएं जीवित मानव हैं जो  प्रतिदिन   खीसक  जाते  हैं। ऐसा   देशों   में   क्या   होता  है सीमाओं पर जवान मार...

विश्व रक्तदान दिवस पर कविता "रक्तदान के भावों को, शब्दों में बताना मुश्किल है" को क्लिक पूरी पढ़ें।

विश्व रक्तदान दिवस पर कविता "रक्तदान के भावों को, शब्दों में बताना मुश्किल है" को क्लिक पूरी पढ़ें। विश्व रक्तदान दिवस पर कविता  ==================== रक्तदान    के     भावों    को शब्दों  में  बताना  मुश्किल  है कुछ  भाव  रहे  होंगे  भावी के भावों को  बताना  मुश्किल  है। दानों   के    दान    रक्तदानी   के दावों   को   बताना   मुश्किल  है रक्तदान  से  जीवन परिभाषा की नई कहानी को बताना मुश्किल है। कितनों    के    गम    चले     गये महादान को समझाना मुश्किल है मानव   में    यदि    संवाद    नहीं तो  सम्मान   बनाना   मुश्किल  है। यदि   रक्तों   से   रक्त   सम्बंध  नहीं तो  क्या...

"ये जीवन लहर है, कुटिल हर डगर है" रामाशीष तिवारी शजर की पूरी रचना क्लिक कर पढ़ेंं।

"ये जीवन लहर है, कुटिल हर डगर है" रामाशीष तिवारी शजर की पूरी रचना क्लिक कर पढ़ेंं। ये जीवन लहर है     कुटिल हर डगर है         मग़र साथ हरदम,              मेरा हमसफर है। न इसकी खबर है      कि जाना किधर है          न है ख़ौफ़ इसका,             क़ि मुश्किल सफर है। कहीँ पर निशाना       कहीँ पर नज़र है            न घर है तुम्हारा,                 न  मेरा  ही दर है। उसी का करम है     उसी की उमर है,          क़लम है ये जिसकी               उसी  की  नज़र है। है मंज़िल को पाना      तो थकना मना है          जो रुकता नही है               वो निर्भर,निडर है। जो थकता नहीँ है       जो रुकता नहीँ है       ...

महराजगंज : पर्यावरण दिवस पर आयोजित काव्य गोष्ठी में दयानन्द त्रिपाठी को मिला सम्मान

महराजगंज : पर्यावरण दिवस पर आयोजित काव्य गोष्ठी में दयानन्द त्रिपाठी को मिला सम्मान  जनवादी पत्रकार संघ के तत्वाधान में जनवादी परिचर्यम साहित्य संघ मध्यप्रदेश के अंतर्गत विश्व पर्यावरण दिवस को आयोजित ऑनलाईन काव्यगोष्ठी कार्यक्रम के अंतर्गत 425 से अधिक साथियों/सदस्यों/रचनाकारों द्वारा प्रतिभागिता की गई जिसके अंतर्गत पर्यावरण पर आधारित रचना/विचार ऑडियो व लेखन के माध्यम से प्रेषित करने हेतु मंच द्वारा प्रशस्ति पत्र भेंट कर 94 रचनाकारों को सम्मानित किया जा रहा है इसी क्रम में  उत्तर प्रदेश महराजगंज से दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल को प्रशस्ति पत्र देकर आज सम्मानित किया गया । सभी रचनाकारों को शुभकामनाएं जिन्होंने इस आयोजन में अपनी सहभागिता देते हुए अपना बहुमुल्य समय निकाल कर इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया तथा मंच को गौरवान्वित किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य यह था कि; ◆हम सभी अपनी धरा को हमेशा स्वच्छ बनाये रखेंगे। ◆ हम अपनी धरा पर पानी का बचाव करेंगे व जल सुरक्षित करेंगे। ◆ हम अपनी धरा को प्रदूषित होने से बचाएंगे। ◆ हम सभी मिलकर वृक्षारोपण को बढ़ावा देंगे। कार्यक्रम सम्पादक व स...